
एक आदमी बोला मैं बहुत खुश हूं ये दुनियां बडी खूबसुरत है मैने कहा बिल्कुल ठीक वाकई जन्नत है
दुसरा आदमी आया और बोला मैं बहुत दुखी हूं परमात्मा ने इतनी दुख भरी दुनियां आखिर क्यों बनाई मैं जीना नही चाहता मैने कहा तू भी बिल्कुल सही वाकई साक्षात नर्क है ये दुनियां
एक तीसरा आदमी खडा था उसने पूछा आप तो बडे अजीब इन्सान हो दिलासा देने की बजाये दोनों की हां मे हां मिलाते हो मैने कहा तू तो उन दोनो से भी सही
सारा वार्तालाप एक य क्ष सुन रहा था वो बोला - ये हां मे हां नही मिलाते बल्कि तुम तीनो से भी ज्यादा सही कहते हैं परमात्मा ना दुख:, ना सुख और ना ही निर्णय है परमात्मा तो तुम जैसा भी देखना चाहो, वही यानि तुम्हारा ही प्रतिरुप है
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