Monday, 3 May 2010

parmatma


एक आदमी बोला
मैं बहुत खुश हूं
ये दुनियां बडी खूबसुरत है
मैने कहा बिल्कुल ठीक
वाकई जन्नत है


दुसरा आदमी आया और बोलाparmatma2
मैं बहुत दुखी हूं
परमात्मा ने इतनी
दुख भरी दुनियां
आखिर क्यों बनाई
मैं जीना नही चाहता
मैने कहा तू भी बिल्कुल सही
वाकई साक्षात नर्क है ये दुनियां


एक तीसरा आदमी खडा था
उसने पूछा
आप तो बडे अजीब इन्सान हो
दिलासा देने की बजाये
दोनों की हां मे हां
मिलाते हो
मैने कहा
तू तो उन दोनो से भी सही


सारा वार्तालाप एक य क्ष
सुन रहा था
वो बोला - ये हां मे हां नही मिलाते
बल्कि तुम तीनो से भी
ज्यादा सही कहते हैं
परमात्मा ना दुख:, ना सुख
और ना ही निर्णय है
परमात्मा तो तुम जैसा भी
देखना चाहो, वही

यानि तुम्हारा ही प्रतिरुप है
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तुम्हारे होंठों का तिलsanwali2jpg
जैसे सावली साँझ का
चमकता एक तारा
श्यामल सा रंग सांझ का
तुम्हारे केशो से चुरा लाई सारा
भीनी भीनी मंद हवा की खुशबु
सजाये तेरी यादों से हर नज़ारा
सांवली सांझ की तन्हाई मे
बिखरा जैसे अस्तित्व सिर्फ़ तुम्हारा